नशा, दान और पुस्तक
नशे की लत में जिंदगी
👉कहने का क्या है वे लोग तो कह देते हैं कि हम तनाव को भुलाने के लिए शराब पीते हैं। इसी से हमारे मन को शांति मिलती है। नशा करने से दुखों और तनाव से मुक्ति मिलती है, लेकिन क्या सचमुच नशा करने से व्यक्ति दुखों से मुक्त हो जाता है? अगर ऐसा होता तो पूरे विश्व में कोई भी दुखी और चिंताग्रस्त नहीं होता।
कई लोगों की जान
अब तुम तो संभल जाओ
बचा लो अपने प्राण
मानव जीवन बहुत ही निर्मल। अब तुम तो संभल जाओ
बचा लो अपने प्राण
- 👨👩👧👦 मानव जीवन में निर्मलता, सज्जनता, संवेदनशीलता और चरित्रता होती है। वह खुद का ही नहीं बल्कि अपने मिलने वाले सभी का उद्धार करता है। इसके विरुद्ध गलत आदतें मनुष्य को स्वयं के पतन की ओर प्रेरित करती हैं। और उनका मजाक करती हैं जो अच्छे स्वभाव के होते हैं।
एक पतन की ओर अग्रसर व्यक्ति समाज और राष्ट्र के लिए भी बहुत ही घातक सिद्ध होता है। इसलिए समाज सुधारक और धार्मिक नेता समय-समय पर दुष्प्रवृत्तियों की निंदा करते हैं और उन से बचने के लिए भी प्रेरणा देते हैं।
मदिरापान और नशा सब बुराईयों की जड़ होते हैं।
किसी विद्वान् ने यह बात बिलकुल सत्य कही है कि मदिरापान सब बुराईयों की जड़ होती है। मदिरा मनुष्य को असंतुलित बनाती है। शराबी व्यक्ति से किसी भी समाज की बुराई की अपेक्षा की जा सकती है। इसी कारण से हमारे शास्त्रों में मदिरापान को पाप माना जाता है।
दारु - गुटखा खाकर,
लोग दिखाते हैं शान
कैंसर को निमंत्रण देते,
और गवाते अपनी जान
नशे की लत की शुरुआत
👉 https://youtu.be/3u-8EqWBBO8
शुरू में तो व्यक्ति शौक के तौर पर नशा करता है। उसके दोस्त उसे मुफ्त में शराब पिलाते हैं। कुछ लोग ये बहाना बनाते हैं कि वे थोड़ी-थोड़ी दवाई की तरह शराब को लेते हैं लेकिन बाद में उन्हें लत पड़ जाती है। जिन लोगों को शराब पीने की आदत पड़ जाती है उनकी शराब की आदत फिर कभी भी नहीं छूटती।
शराबी व्यक्ति शराब को पीकर विवेकशून्य हो जाता है और बेकार, असंगत और अभद्र व्यवहार करने लगता है। उसकी सोच में दुष्ट प्रवृत्ति का समावेश होने लगता है। वह शिक्षा, सभ्यता, संस्कार और सामाजिक मर्यादा को तोडकर अनुचित व्यवहार करने लगता है। गाली-गलोंच और मारपीट उसके लिए आम बात हो जाती है।
कहने को तो कम मात्रा में शराब दवाई का काम करती है। डॉ और वैद्य भी इसकी सलाह देते हैं लेकिन ज्यादा तो प्रत्येक वस्तु का बुरा है। ज्यादा पीने से ये शराब जहर बन जाती है। नशे की लत से हमने बड़े-बड़े घरों को उजड़ते हुए देखा है।
जिस पैसे को व्यक्ति खून-पसीना एक करके सुबह से लेकर शाम तक कमाता है जिसके इंतजार में पत्नी और बच्चे बैठे होते हैं वह नशे की हालत में लडखडाता हुआ घर पहुंचता है। पड़ोसी उसे देखकर उसका मजाक उड़ाते हैं, मोहल्ले वाले उसकी बुराई करते हैं लेकिन बेचारी पत्नी कुछ नहीं कह पाती है। वह केवल एक बात से डरती रहती है कि उसका शराबी पति उसे आकर बहुत पीटेगा। इसलिए वह बेचारी दिल पर पत्थर रखकर जीवन को गुजार देती है।
आंखों देखी घटना जिसको सुनकर दिल दहल जाएगा
🤔 दान की उचित जगह और पुस्तक 📚 का महत्व
एक समय एक भिखारी रोड पर बैठा भीख मांग रहा था हमेशा की तरह वह 50-60 रू भिख में प्राप्त कर लेता था। और उन रुपए से शराब का नशा करता था हमेशा की तरह एक दिन वह भीख मांग रहा था एक दयालु व्यक्ति ने दया में आकर ₹100 दे दिए हमेशा वह एक थैली पीता था उस दिन उसने तीन-चार थेली पी ली उस दिन उसने घर जाकर अपने बीवी बच्चों को इतना मारा कि बीवी ने घर छोड़ दिया और बच्चों सहित कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली तो उस व्यक्ति की दया उस परिवार के टूटने का कारण बनी जिससे कि उसका किया दान उस परिवार के झड़ने का कारण बना। इसीलिए दान भी सही जगह कीजिए और उस व्यक्ति ने अपने जीभ के स्वाद अर्थात नशे की लत के कारण अपने परिवार को उजाड़ दिया।
तो फिर इस नशे की लत मैं तनाव दूर हुआ या और बढ़ गया आप स्वयं विचार कर ले लीजिए।
कुछ दिन उपरांत उस भिखारी को एक व्यक्ति ने "जीने की राह" पुस्तक दी उसने उसको पढ़ा और उन्होंने भिखारी को समझाया कि नशा जीवन समाप्ति की जड़ है। तो उस व्यक्ति ने नशा करना छोड़ दिया और संत रामपाल जी महाराज की शरण ग्रहण करके अपना जीवन धन्य किया। उस दिन के उपरांत उसने किसी भी प्रकार का नशा नहीं किया जिससे कि वह आज एक सुखी जीवन जी रहे हैं तो मात्र एक पुस्तक पढ़ने से जिंदगी सुधर गई जबकि उस दानी व्यक्ति के ₹100 ने जिंदगी उजाड़ दी।
इसलिए आप भी आइए संत रामपाल जी महाराज की शरण ग्रहण कीजिए और अपना जीवन कल्याण करवाएं।






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